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मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ : पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में इलाज की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ और ही सरकार को यह पता कि मरीज कितने
जालोर में à¤à¤• ही परिवार के चार लोगों की मौत को चिकितà¥à¤¸à¤•ों ने मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ का अंदेशा जताया
मसà¥à¤•à¥à¤²à¤°à¤¡à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ के पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में कितने मरीज हैं, इसकी जानकारी देश के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ तक को नहीं है। यही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ की à¤à¥€ है। केंदà¥à¤° सरकार ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ विकलांगता अधिनियम वरà¥à¤· 2012 के तहत इस बीमारी के मरीजों को विकलांगता की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में तो लेने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया लेकिन यह बिल à¤à¥€ पास नहीं हो पाया।
नà¥à¤¯à¥‚रोलोजी के चिकितà¥à¤¸à¤•ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यह इतनी रेयर बीमारी नहीं है, बावजूद अà¤à¥€ जेनेटिक होने के कारण इसका उपचार संà¤à¤µ नहीं है। मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ ऑफ यूà¤à¤¸à¤ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दो हजार में से à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को यह बीमारी होती है। बावजूद इसके इस मरà¥à¤œ से पीड़ितों को तो सरकारी सà¥à¤¤à¤° पर कोई राहत मिल रही है और ही चिकितà¥à¤¸à¤¾ जगत से। साथ ही इस बीमारी के उपचार की à¤à¥€ कोई वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ नहीं होने से गरीब मधà¥à¤¯à¤® तबके के मरीज तो इसका उपचार à¤à¥€ नहीं करा पाते। चिकितà¥à¤¸à¤¾ विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ की मानें तो इस बीमारी को सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® सेल थैरेपी से महज नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है, लेकिन यह थैरेपी देश के दो-तीन बड़े निजी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में ही उपलबà¥à¤§ है। à¤à¤¸à¥‡ में मधà¥à¤¯à¤® तबके के मरीजों के लिठयह थैरेपी लेना उनकी पहà¥à¤‚च से दूर है।
मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ के इलाज की यूं तो देशà¤à¤° में कोई खास वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ नहीं है, लेकिन मांसपेशियों को सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ से रोकने के लिठकà¥à¤› दवाइयां दी जाती हैं। इसके अलावा विकलांग उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है, जबकि कà¥à¤› मरीजों के लिठशलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ की जा सकती है। हालांकि सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® सेल थैरेपी से इस बीमारी को कà¥à¤› हद तक नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है, लेकिन इस थैरेपी की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ देश के मà¥à¤‚बई, पूना, बेंगलूर तथा चेनà¥à¤¨à¤ˆ में इकà¥à¤•े-दà¥à¤•à¥à¤•े बड़े निजी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में ही उपलबà¥à¤§ है। साथ ही यह थैरेपी काफी महंगी होती है, जो आमजन की पहà¥à¤‚च से काफी दूर होती है। वैसे आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में पंचकरà¥à¤® के तहत इस बीमारी के रोगी को थोड़ी राहत मिल सकती है।
{मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ यूà¤à¤¸à¤ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿ 2000 वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• को यह बीमारी
{वरà¥à¤· 2012 में केंदà¥à¤° सरकार ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ विकलांगता अधिनियम बिल तैयार किया था लेकिन वह पास नहीं हो सका, इसमें मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ पीड़ित मरीजों के लिठà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ थे
{जेनेटिक मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ का कोई उपचार नहीं, अà¤à¥€ तक की रिसरà¥à¤š में सिरà¥à¤« थैरेपी से कà¥à¤› हद तक रोके जाने के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ होते हैं, वह à¤à¥€ मà¥à¤‚बई और बैंगलूर जैसे बड़े सेंटरों पर
{बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वंशानà¥à¤—त होने वाली मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ में 20 साल की उमà¥à¤° तक आते-आते मरीज की मौत हो जाती है।
^यह आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक रोग है। इसका कोई इलाज संà¤à¤µ नहीं है। हां, मरीज को नियमित वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से फायदा मिल सकता है। वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से मांस पेशियां सिकà¥à¥œà¥‡à¤‚गी नहीं जिससे यह बीमारी आगे नहीं बà¥à¥‡à¤—ी। -डॉ. चंदà¥à¤°à¤®à¥‹à¤¹à¤¨ शरà¥à¤®à¤¾, नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिसà¥à¤Ÿ,à¤à¤¸à¤à¤®à¤à¤¸, जयपà¥à¤°
^हालांकि मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ का कोई इलाज नहीं है, लेकिन सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® सेल थैरेपी से इस बीमारी को आगे बà¥à¤¨à¥‡ से रोका जा सकता है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® सेल थैरेपी की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ देश के कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शहरों में ही उपलबà¥à¤§ है। वैसे मà¥à¤‚बई के सायन सरकारी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¥€ यह थैरेपी दी जाती है। -डाॅ. नंदिनी गोकà¥à¤²à¤šà¤‚दà¥à¤°à¤¨, विशेषजà¥à¤ž सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® सेल थैरेपी, मà¥à¤‚बई
{ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के खà¥à¤¯à¤¾à¤¤ नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिसà¥à¤Ÿ डॉ. अशोक पनगड़िया के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ के कई पà¥à¤°à¤•ार होते हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤¯: ये जेनेटिक है और मां के जीन से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लड़कों में ही आती है। मां को यह बीमारी नहीं होती। लेकिन पीड़ित बचà¥à¤šà¥‡ के परिवार में उसके मामा को हो सकती है। बचपन से होने वाली इस बीमारी में पà¥à¤°à¤¾à¤¯: 20 वरà¥à¤· तक आयॠतक मरीज की मौत हो जाती है।
{ दूसरी तरह की डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¯: 20 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° से शà¥à¤°à¥‚ होती है। यह जेनेटिक à¤à¥€ हो सकती है और बाई डिफालà¥à¤Ÿ à¤à¥€à¥¤ इसमें धीरे-धीरे असर दिखता है। और मरीज 50-55 साल या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤° तक à¤à¥€ सरवाइव कर सकता है।
{ कई बार à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥€ देखा गया है कि पहली बार परिवार में जिस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को यह बीमारी होती है उसमें धीरे-धीरे इसके लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं। उसके पांव-हाथ, सीने में असर दिखता है।
यह है बीमारी के लकà¥à¤·à¤£
पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¤•े सबसे बड़े जयपà¥à¤° के à¤à¤¸à¤à¤®à¤à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिसà¥à¤Ÿ डॉ. दीपक जैन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इस बीमारी में रोगी की मांसपेशियां तेजी से सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगती है जिससे रोगी को चलने-फिरने में कठिनाई होने लगती है। रोगी तेज गति से à¤à¥€ नहीं चल सकता है। कà¥à¤› समय बाद उसे शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लेने में à¤à¥€ परेशानी होती है। इस कारण उसे चढ़ने और उतरने में à¤à¥€ काफी परेशानी होती है। कà¥à¤› लोगों में यह बीमारी जनà¥à¤® से ही होती है, तो कà¥à¤› लोग पांच साल की उमà¥à¤° में इस बीमारी से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो जाते हैं। जब रोगी बीस साल का होता है तब तक उसे चलने-फिरने में परेशानी महसूस होने लगती है। कई मामलों में इस बीमारी के मरीज लकवागà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ à¤à¥€ हो जाते हैं। इसके अलावा मरीज की अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और चेहरे की मांसपेशियों में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ने लगता है। साथ ही उसे ऊंचे कदम उठाकर चलने में परेशानी होती है। कई रोगियों में इस बीमारी के कारण गंजापन जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ है मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€
मसà¥à¤•à¥à¤²à¤°à¤¡à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जिसमें इंसान की शकà¥à¤¤à¤¿ कà¥à¤·à¥€à¤£ हो जाती है तथा मसलà¥à¤¸ कमजोर होने के साथ सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लग जाती हैं। बाद में यह टूटने लगती हैं। चिकितà¥à¤¸à¤¾ विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यह à¤à¤• तरह का आनà¥à¤µà¤‚शिक रोग है, जिसमें रोगी में लगातार कमजोरी आती है और उसकी मांस पेशियों का विकास रà¥à¤• जाता है। इसके अलावा कंकालीय पेशियां (सà¥à¤•ेलेटल मसलà¥à¤¸) नषà¥à¤Ÿ होने लगती हैं। इस बीमारी में मांसपेशियों की कोशिकाà¤à¤‚ मृत होने लगती हैं। धीरे-धीरे इस बीमारी में मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¥ तंतà¥à¤° के मधà¥à¤¯ सामंजसà¥à¤¯ बिगड़ने लगता है तथा पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ बनने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बाधित हो जाती है। इस कारण से मांसपेशियों का विकास रà¥à¤• जाता है।
बीमारी इतनी गंà¤à¥€à¤°
जालोर में à¤à¤• ही परिवार के चार लोगों की मौत
चितलवानाकà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के à¤à¤¾à¤¦à¤°à¥‚णा गांव में पिछले कà¥à¤› वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¤• ही परिवार के चार लोगों की मृतà¥à¤¯à¥ होने का मामला सामने आया है। चिकितà¥à¤¸à¤•ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यह मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ के केस हैं। परिवार के गोवाराम ने बताया कि परिवार में लोगों को लगà¤à¤— 20 साल की उमà¥à¤° में पहले हाथ-पांव में जकड़न की बीमारी शà¥à¤°à¥‚ होती है। फिर बोलने में तकलीफ होती है। अब तक परिवार के à¤à¥‚राराम पà¥à¤¤à¥à¤° गमनाराम, गवरीदेवी प|ी रतनाराम, वगताराम पà¥à¤¤à¥à¤° अमराराम और वीरा पà¥à¤¤à¥à¤° वगतराम की मौत हो चà¥à¤•ी है। वहीं गोवाराम पà¥à¤¤à¥à¤° रतनाराम, पारà¥à¤µà¤¤à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¥‚राराम अमीया पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रतनाराम अà¤à¥€ इस बीमारी से पीड़ित हैं।
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